सिद्धार्थ शुक्ला, नई दिल्लीः साल 2008 में बिटकॉइन आने के साथक्रिप्टो की दुनिया में निवेशकों की बाढ़ सी आ गई। इस क्रेज के चलतेकई पॉप्युलर क्रिप्टो के दाम कम समय में आसमान पर पहुंचने लगे।नतीजा ये हुआ कि छोटा मोटा निवेश करने की चाह रखने वालों केसामने ज्यादा विकल्प नहीं बचे। इस डिमांड का फायदा उठाने के लिएडिवेलपर्स ने इन पॉप्युलर क्रिप्टो टोकन के नाम से मिलते जुलते कईटोकन पेश कर दिए। वजह साफ थी, मौजूदा पॉप्युलर क्रिप्टो के जैसेनाम वाले टोकन की ओर निवेशकों का रुझान जल्दी बढ़ने की गुंजाइशज्यादा थी। इन मिलते जुलते नामों वाले टोकन को आमतौर परऑल्टकॉइन या ऑल्टरनेट क्रिप्टोकरंसी कहा जाता है। आजकल मार्केटमें 13 हजार से ज्यादा ऑल्टकॉइन मौजूद हैं। इतनी भारी संख्या मेंकॉइंस आने से निवेशकों के लिए विकल्प तो बढ़ गए लेकिन साथ में बढ़ीउलझनें। सवाल ये कि, आखिर कौन से ऑल्टकॉइन में निवेश करने परज्यादा रिटर्न की गुंजाइश होगी। इस संशय पर मार्केट एक्सपर्ट्स काकहना है कि तमाम कॉइंस में से दमदार टोकन का चुनाव करने के लिएनिवेशकों को सबसे पहले ये पता करना चाहिए कि ये ऑल्टकॉइन कहांसे आए और ये पॉप्युलर टोकन की तरह कुछ हद तक सुरक्षित हैं यानहीं।
ऑल्टकॉइन आए कहां से हैं, इसे समझने के लिए हार्ड फॉक काकॉन्सेप्ट समझना जरूरी है क्योंकि ऐसे टोकंस के पीछे इसका ही हाथहै। दरअसल पॉप्युलर बिटकॉइन और ईथरियम जैसे क्रिप्टो टोकनब्लॉकचेन टेक्नॉलजी पर काम करते हैं। डिवेलपर्स प्रोटोकॉल के मूलनियमों में बदलाव कर ओरिजनल ब्लॉकचेन में फॉक यानी एक औरशाखा बनाते हैं। इससे असल चेन दो शाखाओं में बंट जाती है और नईचेन नई दिशा पकड़ लेती है। ये शाखाएं भी दो तरह की होती हैं- सॉफ्टफॉक और हार्ड फॉक। जब बेसिक प्रोटोकॉल इतना बदल दिया जाएकि पीछे की कड़ियों से इसका कोई नाता ही न रह जाए उस प्रक्रिया कोहार्ड फॉक कहते हैं। नई चेन के आधार पर एक नया कॉइन तैयार कियाजाता है। बिटकॉइन कैश और बिटकॉइन गोल्ड जैसे कॉइंस, ओरिजिनलबिटकॉइन नेटवर्क में हार्ड फॉक का नतीजा हैं। ईथरियम क्लासिक भीईथरियम से निकला है।