नवभारत गोल्ड टीमः बिटकॉइन के 11 साल के इतिहास में ऐसे तीनमौके आए, जब इसकी वैल्यू 85 प्रतिशत तक घट गई। ऐसी ही सबसेहालिया गिरावट देखने को मिली थी दिसंबर 2017 से दिसंबर 2018 केबीच। उस समय इसकी वैल्यू 20 हजार से 3000 डॉलर के आसपासचली गई थी। आजकल यह 46 हजार डॉलर के आसपास चल रहा है।क्रिप्टो में निवेश का शौक रखने वाले लोगों को खुद को इस तरह केउतार चढ़ाव के लिए तैयार रखना चाहिए। इसके लिए ये समझना जरूरीहै कि आखिर किन वजहों से ऊपर-नीचे होती हैं क्रिप्टोकरंसी की वैल्यू? पहला कारण तो डिमांड और सप्लाई का समीकरण है। नए निवेशकबाजार में आते हैं तो वे नया पैसा लाते हैं। जब यह सैलाब बढ़ जाता हैतो भाव ऊपर चढ़ जाता है। कभी कोई बुरी खबर आ जाती है, कोईहादसा हो जाता है, कोई हैकिंग हो जाती है या बहुत फेमस लोग कोईऐसी बात कह देते हैं, जिससे मार्केट में थोड़ी नर्वसनेस आ जाती है, तोबाजार में घबराहट फैल जाती है। नतीजा ये होता है कि जिन नएनिवेशकों की वजह से कीमतें चढ़ रही थीं, वे भागने लगते हैं और मार्केटगिर जाता है। क्रिप्टो मार्केट में धोखाधड़ी के खतरे भी हैं। एक जानकारके मुताबिक बताते हैं अक्सर ऐसा होता है कि बिटकॉइन को 35 लाखरुपये पर देखकर लोग कहते हैं कि इतने पैसे तो हमारे पास हैं नहीं, तोचलो कोई और चीज देखते हैं। ऐसी सोच रखने वाले लोगों को अक्सरबिना वैल्यू की चीजें बेची जाती हैं। यह ठीक वैसा ही मामला है कि कोईकहे कि सोने की कीमत 60 लाख रुपये किलो हो गई, मैं तो उसे खरीदनहीं सकता तो चलो मैं प्लास्टिक ही ले लेता हूं।
घुट्टी का काम करेंगी ये सावधानियां केवल उन्हीं इकाइयों से डील करें, जहां केवाईसी प्रोसेस पूरा कियाजाता हो बाकी कहीं से भी कोई भी खरीदारी आफत को दावत देने केबराबर है। क्रिप्टो के मामले में शेयरों की तरह डिमैट अकाउंट याडिपॉजिटरीज जैसी चीजें नहीं हैं। इसके लिए हॉट वॉलेट, कोल्ड वॉलेट, सॉफ्टवेयर वॉलेट जैसी चीजें आती हैं। इनके उपयोग में बहुत सावधानीरखनी चाहिए। ऐसी क्रिप्टोकरंसीज से सावधान रहें, जिनकी कोईअंडरलाइंग वैल्यू न हो। खासतौर से मार्केट की तेजी के दौर में ऐसेप्रोजेक्ट्स आ सकते हैं, जिनकी वैल्यू भले ही कम हो, लेकिन वे तेजी सेबढ़ते हैं। हर ग्राहक को इनसे सावधान रहना चाहिए।